"You two were blabbering like hippopotamus!"
कल रात कबीर की शिवि से बातें सुन लगा की वो इतना क्रियेटिव हो गया है की एक बार को मुझे उसे क्रियेट करने पर गर्व होने लगा। आज कबीर पूरे दस के हो गए। अपने समय से दो महिने पहले आज के दिन आ कर मेरे और अपने मन्ना(संजय) के जीवन में एक नया रंग भर दिया था। मैं तो जन्म देते ही सो गई क्योंकि सी-सेक्शन की सोने की दवाई जल्दी असर कर गई। मुझे तो चार घंटे में होश आया पर ये पहले सीधे मन्ना के गोद में गए। नर्स ने देते हुए पूछा था, "आप सबसे नज़दीकी है?" संजय ने बाद में बताया की कैसे पूरी आँख खोल पर संजय को एकटक देख रहा था। जैसे कुछ कह रहा हो। कुछ देर में नर्स ने ले कर बच्चों के आईसीयू में भरती कर दिया। शाम को मन्ना चले गए और मम्मी पापा आ गए थे। मुझे दूध निकाल कर कबीर के पास जाने दिया। गोद में तो तीन दिन बाद लेने दिया क्योंकि फेफड़े पूरी तरह तैयार नही थे। पूरे दो किलो के थे पर सातवें महिने में पानी समेत इतने थे की फ़ुल टर्म पर साढ़े चार किलो के होते। डॉक्टर बोली आप में इतनी जगह नही है की ये आप कर पाती इसलिए जल्दी आ गए। ग्यारहवे दिन घर जाना हुआ!
मन्ना का चार साल तक साथ रहना और अचानक गायब होना कबीर के लिए हादसा था जिससे उबरने में ये जन्म लग जाएगा। मैं जब तक हूँ उसकी पूरी ज़िम्मेदारी लूँगी।
अगले सात-आठ साल में कबीर व्यस्क हो जाएगा और मैं अपनी ज़िम्मेदारी से फ़ारिग़ हो जाऊँगी! तब तक केस का निर्णय भी आ चुका होगा।
(फ़ोटो शिवि ने ली है हम छुट्टी बनाने पंगोट पहुँचे तब की! कैमरा संजय का!)
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