त्रिपाठी जी और पांडे जी लोगों के नाम पर हँस रहे है। नाम जैसे ग़रीब, जूठन, झंगार, गुदोलिया और उनसे जुड़ी कहानी। जो नाम पंडित से रखवाए तो ऐसे ही नाम दिए जाते थे। कारण दिया जाता है कि नही रखा तो बच्चे मरते रखेंगे।
"हम ब्राह्मण है खाना पहुँचा दो तो पुण्य मिलेगा। ठाकुर नही है की बोटी शोटी मँगवाए। पनीर पराँठे ले आओ बस दोस्त। आ जाना!" ही ही ही फँस गया हो गया जुगाड़ आज का!
जूहू चौपाटी में चना बेचने वाले जब मुंबई से गाँव आते थे तो लाल मोज़ा, मुँह के साइड में सिगरेट और बग़ल में रेडियो दबा कर गाँव में घूमते थे। ये नीची जाति वालों को बड़ा दिखने के नए नए शौक! और सबसे बड़ा शौक़ बात बात पर पंडित से जजमानी करवाना। जैसे ठाकुरों की शादी होती है वैसी बरात निकालना!
एक पंडित जब आपका जजमान बनता है तो आपके उद्धार का दाइत्व लेता है। जो ग़रीब ज़जमानी न करा सके तो और दरिद्र हो जाए तो जजमानी न करना थोपा जा सकता है और जो समृद्ध जजमानी करवाए उसकी हर सफलता को कारण मिल जाता है। कर्म के सिद्धांत से जोड़ दो और जजमानी करवाना दान देना सब अच्छे कर्मों में जोड़ दो तो गीता साक्षात सत्य हो जाती है! जो न करवाए उसके दुखों को ज़ूम कर दो और जो करवाए उसके सुखों को, सब बढ़िया मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है। जजमानी भी तो एक सर्विस ही है जो ब्राह्मणवाद बेचती है! ब्राह्मण सबसे पहले पूँजीवादी थे!
इनके बहुत से प्रोडक्ट है और हर एक उनके प्रोफ़िट मार्जिन में संचयी प्रभाव डालता है। जन्म से शुरु हो जाती है जजमानी। जन्म पर नाम देना वो भी ऐसा जो दासता, दीनता या उद्दंडता के सूचक हो। पंडित का दिया नाम है तो उम्र भर चिपका रहेगा। फिर सीधे शादी, पढ़ने पढ़ाने पर कोई रीति रिवाज की क्या ज़रूरत क्योंकि उससे तो दूर रखना है। शादी में पाणिग्रहण और कन्यादान कर के उन औरतों को दोयम बना देना जहाँ लड़का-लड़की में भेदभाव ब्राह्मण परिवारों के देखादेखी शुरु हुआ है!
और मौत पर तो अजीब ही माजरा है। वो समाज वो पूर्वजों को पूजते है और उन्हें अपने नज़दीक रखते है उनको पूर्वजों के डरना और पितृ शांत करना बताया जाता है। जो बुरे कर्म करेगा उन्हें ही तो अपने पूर्वजों के भटकने का ज़्यादा शक होगा।
जजमान बन श्राद्ध करवाना तो तभी बनता है जब आपके पूर्वजों ने ब्राह्मणों के तरह दूसरों का ख़ून चूसा हो! बाक़ी बची कथा पूजा कुछ नया करने से पहले जन्मदिन या किसी सफलता पर जहाँ जजमानी नए तरीक़े से बढ़ रही है! पंडित अपना कमीशन ले रहा है इन्वेस्टमेंट के नाम पर ताकि उससे जूड़ी सफलता उसकी। हर असफलता की ज़िम्मेदारी आपकी है। कोई ग़लती क्योंकि पंडित ग़लती नही करते!
वैसे अजीब बात है की जजमानी ऊँच नीच नही देखता। पैसे से छुआछूत नही होता किसी के भी हाथ से गुज़र जाए! दूध घी सब्ज़ी फल अनाज से भी नही होता!
जन्म शादी मरण और रैंडम जजमानी बंद करदो ब्राह्मणवाद का अंत सुनिश्चित है!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें