बात २०१३ की इन्हीं दिनों की है। बेटी बारहवीं में थी। अचानक उसके गले में एक गिल्टी हो गई जो बड़ी तेज़ी से बढ़ रही थी। डॉक्टर को दिखाया गया। कुछ भी हो सकता था। इससे पहले वो तीन कोर्स टीबी के कर चुकी थी। जड़ से नही ख़त्म होने की वजह से दवाई से साइड एफेक्ट से परेशान वो ही नही मैं भी थी। इसी बीच स्मोकिंग और मानसिक अस्थिरता के चलते उसकी लगातार काउंसिलग चल रही थी। हर शनिवार गुड़गाँव से साकेत देश के सबसे बेहतरीन साइकेट्रिस्ट से ट्रीटमेंट।
मैं बहुत ही डर गई थी। फ़ोर्टिस में दिखाया। टेस्ट कैंसर से ले कर एचआईवी तक के। टेस्ट की रिपोर्ट नही आती तब तक मेरी सांसे रुक जाती थी। पर कुछ भी समय जाया नही कर पा रही थी। उन्हीं दिनों वोडाफ़ोन और आरआईएल का जॉब ऑफ़र आया था तो तीन वीडियो इंटरव्यू दे चुकी थी। नौकरी और नन्हें कबीर की देखभाल अलग!
फिर मेडीसिटी में दूसरा ओपिनियन लिया उन्होंने और दस टेस्ट करवाये। कोई पॉज़िटिव निकलता तो इलाज शुरु होता। टीबी की दवाई बस यूँही शुरु कर दी थी पर उससे कुछ असर नही हो रहा था और गिल्टी बढ़ती जा रही थी। डॉक्टर ने कहा की एक डायगनोस्टिक ऑपरेशन करना पड़ेगा पर गील्टी जहा है वहाँ ऑपरेशन ख़तरनाक होता है। होने के बाद दो महीने नली लगी रहेगी। मुश्किल समय था। जिस दिन ऑपरेशन का तय हुआ उससे एक दिन पहले मुझे मुंबई वोडाफ़ोन का फ़ाइनल इंटरव्यू के लिए जाना था।
मैंने उसके लिए मम्मी को बुला लिया था। शिवि के पापा भी गुड़गाँव में थे। सुबह निकली मुंबई पहुँच कर इंटरव्यू दिया फिर पता नही क्यों मुझ नास्तिक में सिद्धिविनायक जाने का मन हुआ। गई कुछ नही किया जब तक समय था आँख बंद किए खड़ी रही और रोती रही।
एक दोस्त को बताया शिवि के बारे में तो उसने शायद संजय को बताया होगा। उसने बताया की शिवि के लिए संजय बाइक काँवर ले कर जा रहे है।
वापस आई तो ऑपरेशन की तैयारी हुई। मैं अपना खीज विक्रम पर निकाल रही थी। बेचारे मदद करने की कोशिश कर रहे थे पर मुझे अपने बच्चों के लिए पूरी दौड़ भाग ख़ुद करना ही पसंद है। किसी और पर कभी भरोसा नही किया है, उनके पापा पर भी नही।
ख़ैर ऑपरेशन ठीक से हो गया। उसके रिज़ल्ट में पंद्रह दिन लगे और वो समय सच में बहुत ही कठिन था।
शिवि के गले से निकल रहा ट्यूब देख कर कोई भी डर जाता। उसकी सफ़ाई रखना और पानी से दूर रखना अलग।
रिपोर्ट आई। कुछ नही था। लिम्फ नोड ऐसे भी फूल सकती है! मेरा वोडाफ़ोन में हो गया था और मुझे भी एक महीने में मूव करना था। शिवि को पहली बार उसके पापा के पास छोड़ कर जा रही थी वो भी बारहवीं में। जो भी हुआ अच्छा हुआ, शिवि ९६% ला कर पास हो गई!
(काँवर और श्रद्धा पर याद आया)