बात जबलपुर की है, वो शहर जहाँ सड़क पर सबसे ज़्यादा लड़कियाँ दिखेंगी। पर टेलीकॉम ट्रेनिंग सेंटर की रोड सुनसान होने के कारण बदनाम थी। वहाँ लड़की को देख कर सीटी बजाना और मुँह से अजीब अजीब आवाज़ निकालना आम था।
अक्सर रात को खाना खाने के बाद हम वाॅक पर उस रोड पर चले जाते थे।
एक दिन मैं अपने दो साथी राजेश और देवेन्द्र के साथ घूमने निकली। कुछ दूर ही निकले थे कि कुछ लड़कों ने रास्ता रोक दिया। एक मुझे बोला, "मुझे तुमसे बात करनी है।" यह देख देवेन्द्र ने मुझे पीछे करते हुए उसको हड़काते हुए बोला, "बोल क्या बात करनी है?"
इतने में उनमें से एक चाक़ू निकाल कर बोला, "तू इसका भाई लगता है क्या?"
हम तीनों निहत्थे थे। मैं घबरा गई। पर बिना डरे देवेन्द्र बोला, "मेरी जो भी लगती है, तेरी कुछ नहीं लगती! हिम्मत है तो कल हौस्टल में आ कर दिखा। न तुम्हारे सबके हाथ पैर तोड़ दिए।"
बस इतना कहना था कि उनमें से एक बोला, "छोड़ दे यार।"
वो हट गए! वापस आते वक़्त राजेश बोला, "देख हम तुझे बहन तो बनाने से रहे, छेड़ नहीं पाएँगे, पर आज से तू हमारी साली!"
दोनों उस वक़्त शादीशुदा थे। पिछली साल राजेश ने आत्महत्या कर ली। उस दिन जब मैं अलीगढ़ पहुँची तो उसकी पत्नी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी, "उठो राजेश, देखो तुम्हारी काली साली आ गई!"
देवेन्द्र आज हैदराबाद में डी आई जी पुलिस है। और मैं शायद आज भी उसकी साली हूँ!