बाकि सब पैडमेन का नही पता आज हमारे कब्बू असली पैडमेन बन गए!
सुबह उठी तो लगा रात ज़्यादा डाँस का नतीजा है की शरीर में दर्द है। थोड़ा शक हुआ तो लेटे लेटे ही नीचे चेक करने लगी। कबीर मेरे सने कपड़े देखते ही बोला, "मेरे को ख़ून देखना अच्छा नही लगता!"
इसपर शिवि बोली, "पर कब्बू तुम भी इसी ख़ून से निकले हो।"
कब्बू बड़े मैन ऑफ़ थ हाउज की तरह बोले, "जाओ और पैड पहनो।"
मैं आलस में उठ कर अलमारी तक गई तो कबीर ड्रॉअर छान रहे थे। फिर बाथरूम में भी रखने वाली जगह देख कर बोले, "आपने पहले क्यों नही ख़रीदा?"
"पहले कब ख़रीदती थी घर के कपड़े के पैड थे न। बीच में रुका तो सोचा छुट्टी हो गई और सब नॉयडा में छोड़ दिया। आप नीचे से ले आओ न!"
ओके मम्मा कह कर तैयार हो कर एक पर्ची पर लिखवा कर चले गए। जाते ही शिवि बोली, "बॉयस की बचपन से ये सब देखने करने की आदत हो जाए तो बड़े हो कर वो इसे नोर्मल लेंगे! आप इसे फ़ेसबुक पर डालो।"
कबीर ने ला कर बड़े सहजता से हमें पैकेट पकड़ाया। शिवि ने पता किया क्या क्या हुआ। सब नॉर्मल रहा। ये शर्म कोतहूल लोगों का डर सब समाजिक है। कोई बच्चा ये सब के साथ पैदा नही होता।
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