रिश्ते रिसते है सदा के लिए!
कबीर चार साल के हो गये थे। संजय उसके जन्मदिन पर नही आ पाए थे। कुछ दिन पहले ड्राइवर को भेजा था मम्मी की दवाई, जो वो लखनऊ से लाए थे, उसके साथ।
तारीख़ ३० अप्रेल थी शायद। हमारी चंद दिन पहले हुई एल्यूमनी मीट (alumni meet) की तस्वीर संजय के सामान के साथ चली गई थी, उसे देने आ रहे थे। कबीर ने नर्सरी की पढ़ाई शुरु ही की थी हेरीटेज स्कूल में। संजय बोले क्या गिफ्ट लाऊँ। मैने कहा मैने कुछ बनाया है आप दे देना। फिर देखना।
जैसे ही बेल बजी कब्बू "मन्ना" कहते हुआ दरवाज़े पर दौड़ा। मैने एक प्यारा सा जिंजर ब्रेड मैन (ginger bread man) चुपके से संजय को पकड़ा दिया पीछे पीछे।
संजय ने कबीर को जब वो दिया तो कबीर कूदने लगे। "मन्ना लाया!" बारिश हो रही थी, शिवी के साथ संजय ने मेरे बनाए चाय पकोड़े खाए। दोनो बहुत देर बाप बेटी की तरह बतियाते रहे।
फिर संजय बोले रुको बाथरूम हो कर आता हूँ। मै पीछे पीछे चली गई। संजय से दो महिने के बाद मिली थी। मै बिस्तर पर औंधे मुँह लेट गई। निकल कर संजय ने मुझे किस किया, बोले जल्दी आता हूँ आज जल्दी लौटना है।
ये हमारी आख़री मुलाक़ात थी।
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