बचपन से जवानी के अवस्थांतर का हमारा समय नागालैंड में बीता। मैं और मेरी सहेली जूली क्लास में बाकी बच्चों से छोटे थे। आठवीं में थी तो खूब लैंगिक हँसी मज़ाक़ सुनने को मिलता। हर किसी का नाम का ब्रैंड का फ़ुल फ़ोर्म हो जाता! जैसे 'Amita' का 'alright meet-me in the attic' या 'Capstan' का ' come and play sometime at night'. बहुत खुला माहौल था और लड़के लड़कियाँ अपने पहले अनुभव साझा करने में हिचकिचाते नही। इसाई थे पर प्रीमेर्रिटल सेक्स पर कोई रोक नही थी। पर कोई प्रेगनेंट हो जाती तो बहुत बवाल हो जाता।। कोई लडकी १५-२० दिन स्कूल न आए तो सब शक करते की फलांफला ने प्रेगनेंट कर दिया है।पर ये बातें खूब होती खुसर पुसर! यही मेरी पहली सेक्स एज्यूकेशन थी।
इधर बड़ा होना क्या होता घर पर किसी ने न बताया। पर घर में टटोल टटोल कर जो होता पढ़ डालते। गीता प्रेस की स्त्री सुबोधिनी जो नाना ने मम्मी को शादी में दी थी वो तो आठ-नौ साल में पढ़ ली थी। ऐसे ही ख़ाक छानते हुए पापा के मम्मी को पत्र या पापा की निजी डायरी पढ़ डाली। पापा के एक स्टाफ़ में नई लडकी थी जिनकी किसी IPS से एंगेजमेंट हुई थी और उनके पुराने बॉयफ्रेंड जो नागालैंड तक आ गया था उसको लिखे प्रेमपत्र और दीदी की डायरी। सब पढ़ कर ज़िंदगी को समझने की कोशिश में लगी थी। शरीर में बदलाव हो रहा था वो भी थोड़ा कोतहुल तो मचाया हुआ ही था। हमारा घर तो पहाड़ी के ऊपर था और आसपास बहुत सारी जगह जहा फल सब्जी मक्का सब कर रखा था।
इधर बड़ा होना क्या होता घर पर किसी ने न बताया। पर घर में टटोल टटोल कर जो होता पढ़ डालते। गीता प्रेस की स्त्री सुबोधिनी जो नाना ने मम्मी को शादी में दी थी वो तो आठ-नौ साल में पढ़ ली थी। ऐसे ही ख़ाक छानते हुए पापा के मम्मी को पत्र या पापा की निजी डायरी पढ़ डाली। पापा के एक स्टाफ़ में नई लडकी थी जिनकी किसी IPS से एंगेजमेंट हुई थी और उनके पुराने बॉयफ्रेंड जो नागालैंड तक आ गया था उसको लिखे प्रेमपत्र और दीदी की डायरी। सब पढ़ कर ज़िंदगी को समझने की कोशिश में लगी थी। शरीर में बदलाव हो रहा था वो भी थोड़ा कोतहुल तो मचाया हुआ ही था। हमारा घर तो पहाड़ी के ऊपर था और आसपास बहुत सारी जगह जहा फल सब्जी मक्का सब कर रखा था।
थोड़े दूर टाइप पाँच के क्वार्टर थे जो इतने बडे़ थे की ३-४ नए कपल को वही दे दिये जाते थे। मेरी एक सहेली सुमी वही रहती थी। मैं स्कूल से आने के बाद अकसर वही चली जाती थी। वहा बहुत बड़ा लिविंग रूम था जहा औरतों की बैठक होती रहती थी। सब खुल कर बात करते! हर तरह की अपने पति से अनुभवों के बारे में शादी से पहले के एडवेंचर। मैं नाटक करती की नही समझ रहा पर सब समझती। एक बार एक छोटा लड़का टेबल के नीचे घुस गया और ऊपर एक लडकी। ४-५ साल के होंगे दोनो, साइड से मुँह निकाल के लडकी बोली मैं मम्मी तू पापा और किस करने लगी! सब आंटी लोग हँसने लगे और एक ने जोड़ा बेटा बॉयज ऊपर होते तो दूसरे ने जोड़ा नही ये भी चलता कभी कभी!एक दिन में सुमी के पास गई तो उसने कहा दीदी आपको कुछ सुनाती हूँ। हम दबे पैर एक और कमरे के पास खड़े हो गए। शू शू करते हुए हमने पूरे लव मेकिंग को बाँस की दीवार के बाहर कान लगा कर मस्त सुना! हाय क्या अनुभव था आज भी सोच कर मु्सकान आ गई!सर्दी के दिन थे मम्मी लोग बाहर कुर्सी लगा कर बैठे थे मैं और सुमी बेड रूम को बंद कर रज़ाई में घुस गए। सर भी अंदर फिर दोनो ने एक दूसरे के शरीर को बढ़िया से महसूस किया। याद नही कितनी देर पर मेरा ये पहला सेक्सूअल एंकाउंटर था। रज़ाई से बाहर निकले तो मारे शर्म के हम भग लिए। हमने दोबरा नही कुछ किया पर जब मैने अब जल्दी में पढ़ा की औरत स्वभाविक तौर पर समलैंगिक है और हेटरोसेक्सुअल प्यार सिर्फ पितृसत्ता का छलावा तो लगा की शायद सही ही है!बचपन से जवानी के ये क़दम उस नन्ही कली की तरह होते हैं जिसे कोई मख़मली स्पर्श ही फूल बना सकता हैं।
