दो साल पहले अपने जन्म दिन पर मैं अकेले लंच करना चाहती थी.. तो मैं गुडगाँव के साइबर पार्क के नीचे पहुँच गयी.. कोई जगह सूझ नहीं रही थी, तो CCD में ही बैठ गयी. अभी आर्डर ही किया था, की एक लेडी मेरे पास आ कर बोली, "आप कबीर की मम्मा हो न?"
"हाँ"
"आपके साथ बैठ सकती हूँ न?"
"हाँ हाँ बिलकुल!"
(याद आया की इनसे तो मिल चुकी हूँ, तो उनका प्यार भरा प्रस्ताव नहीं ठुकरा सकी...)
काफी देर गपशप करने के बाद, वो अपनी कहानी सुनाने लगी...
उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर से थी. तीन बहनों में बीच की. पढाई में बहुत तेज तो हिंदी में पीएचडी कर ली. शादी एक कमर्शियल पायलट से हुई.
अचानक दिल्ली गुडगाँव की चकाचौंध.. तीन बहुत प्यारे प्यारे बच्चे हैं.. एक लड़का और दो लड़कियां..
उनके पति काम के चलते, अक्सर बाहर रहते.. उनकी पार्टियों में उसका दम घुटता तो वहाँ भी नहीं जाया करती थी. फ़ोन पर अक्सर पति को लड़कियों से या उनकी बातें करता पाती..
एक बार कुछ ऑफिस के साथी घर आये, कुछ ड्रिंक्स के बाद, बात एयर होस्टेस पर होने लगी.. कौन किसके साथ सोया हैं, और कौन कितनी हॉट हैं.. उस रात उसने अपने पति को साफ़ कर दिया की अगर दोबारा उसको ऐसा कुछ भी सुनाई दिया तो वो घर छोड़ देगी. अगले दिन से नौकरी तलाश करनी शुरू की.. अब एक कॉलेज में पढ़ा रही हैं.. पति को छोड़ने की नौबत नहीं आई..
जाते जाते बोली, "ये कुत्ते की दुम हैं, इतना आसन नहीं हैं इसका सीधा होना..."
(जो वो कह गई वो सिर्फ उस सोच के बारे में है जो औरत को उपभोग की वस्तु समझती है!!)
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