बात ७ साल पुरानी हैं. २६ जनवरी २००६. "रंग दे बसंती" रिलीज़ हुयी थी. २१ फरवरी २००६, जेसिका
केस में मनु शर्मा और उसके साथियों को विमुक्ति मिली. जनता में भारी आक्रोश था. मोमबतियाँ जल रही थी...
हमें मिले कुछ चंद दिन ही हुए थे. पर हम पूरी तरह एक-दुसरे पर हावी थे...
वो, “मूवी अच्छी थी न?”
मैं, “हाँ मैं बताना चाह रही थी”
वो, “असल में, मैं तुम्हे ये पहले बताना चाहता था.”
मैं, “बोलो, क्या पूछना चाहते हो!”
वो, “ये जो जेसिका के लिए हो रहा हैं, इसका रंग दे बसंती से लेना देना हैं...”
मैं, “हाँ मैं मूवी से सच मैं inspired हूँ!”
वो, “इसलिए मैं चाहता था की तुम उसे देखो!”
मैं, “देव और मैं साथ मिल कर उसपर research करना चाहते हैं”वो, “किस पर”
मैं, “वो मेरी तरह इसकी तह में घुस कर कुछ करना चाहती हैं. हम दोनों को बहुत ख़ुशी मिलेगी. हम एक ग्रुप बनायेगे. जिसमे जेसिका को ले कर सारी जानकारी डालेंगे”
वो, “जेसिका पर”
मैं, “हाँ. एक महीने में देखिएगा हम सच बाहर निकाल देंगे. हाँ हम दोनों को लॉ नही आता. वहाँ आपकी मदद ले लेंगे.”
वो, “क्या जानती हो तुम जेसिका के बारे में?”
मैं, “देव ने मुझे आज के delhi times की आखरी लाइन दिखाई...”
वो, “delhi times :o”
मैं, “हाँ, उसका कहना था “जॉर्ज मनु शर्मा के पीछे २ बजे भागा..”
वो, “और जॉर्ज ने ऐसा क्यों किया??”
मैं, “क्या इतना साबुत काफी नहीं हैं? प्रश्न हैं क्यों भागा”
वो, “किसका”
मैं, “पूरे कोर्ट की proceedings में “क्यों” क्यों नहीं हैं?”
वो, “जॉर्ज कौन हैं? और क्या delhi times ये पहले नहीं जनता था?”
मैं, “वो बीना रमानी का पति हैं”
वो, “अच्छा, वो फिरंग”
वो, “आह! मेरे पसंदीदा elite वर्ग!”
मैं, “कोर्ट में वो सिर्फ अपने आप को बचाती रही. यही कि उसने खून के धब्बे मिटाए की नहीं..”
वो, “तुमने क्या सोचा था, की वो भगवान् हैं??”
मैं, “उसने जेसिका का साथ नहीं दिया.. अब delhi times में रो रही हैं”
वो, “delhi times. bastard tabloid!!”
मैं, “हमने बहुत देर चर्चा की”
वो, “दूर रहो इन सब से!!!”
मैं, “मैंने उसे मनु और उसके विकास और योगराज से रिश्तों के बारे मैं पता करने को कहा हैं!”
वो, “वाह.. मेरी जासूस... This is tiger calling ami... do you copy?"
मैं, “देव का पति उसकी मदद कर सकता हैं.. आज ही उसने नौकरी छोड़ी हैं, बेटा एक साल का हो जाये, उसके बाद फिर करेगी”
वो, “वो क्या करेगा इस मुद्दे पे? Stick his ass upto dp yadav?
मैं, “क्या पता, वो ऐसा ही हैं!”
वो, “हाँ हाँ!! बड़ा होगा!! इसलिए उसने तुम्हे बुलाया था?”
मैं, “पर देव अपनी मर्ज़ी की मालिक हैं. मैं उसे अच्छे से जानती हूँ!”
वो, “तो उसे जो करना हैं, करने दो अपने पति के साथ.. मैं उसके पति को जानता हूँ”
मैं, “सच? कैसे?”
वो, “अब तुम चुप रहो! मैं उस जैसे हजारों को जनता हूँ. मैं उनके बीच में रह चूका हूँ. वो सब किया हैं. देव को खुद करने दो, जो उसे करना हैं..”
मैं, “वो मेरी प्यारी बहन हैं..”
वो, “अब, चुप्प!!”
मैं, “हम एक दुसरे को बहुत प्यार करते हैं”
वो, "why dont you just shut up!!"
मैं, “क्यों?”
वो, “ये सब बर्बाद हो रहा हैं. बिलकुल बर्बाद.”
मैं, “क्या, रंग दे बसंती?”
वो, “मैं तुम्हे आखरी बात समझाने की कोशिश करता हूँ”
मैं, “मैंने खुल के मूवी देखी.. पहली बार इतना खुल के..”
वो, “और अब तुम उसे जीना चाहती हो? किसी district court में जाओ और देखो वहाँ रोज़, हर घंटे क्या होता हैं..”
मैं, “मैंने देखा हैं.”
वो, “तुम्हे एक celebrity का केस क्यों चाहिए?”
मैं, “तुम्हे मैंने बताया नहीं, मेरे पापा भी एक केस लड़ रहे हैं, और मैं अक्सर उनके साथ जा चुकी हूँ..”
वो, “हाँ, उनका साथ दो. जेसिका का साथ देना बर्बादी हैं”
मैं, “पर पिछले ४ सालों वो केस बिलकुल नहीं बढ़ा हैं”
वो, "Stay there!! damn it. why dont you listen!”
मैं, “अच्छा बोलो, मैं सिर्फ सुनती हूँ”
वो, “देव क्यों हैं तुम्हारे साथ? क्योंकि उसने नौकरी छोड़ दी? या वो हीरोइन बनना चाहती हैं और तुम्हारी मदद चाहती हैं?
मैं(चिडाते हुए), “हाँ बहुत सुन्दर हैं वो”
वो, "good bye 😠"
मैं, “सुनो न..”
वो, “मुझे सोना हैं..”
मैं, “अच्छा अब सुनूंगी.. बोलो..”
वो, “नहीं मुझे कुछ नहीं बोलना, और तुम कुछ सुनना नहीं चाहती. कुछ समझना नहीं चाहती. तुम्हे महान बनना हैं. सच बताऊँ ये तुम्हारा १० पॉइंट सिंड्रोम ओवरटाइम काम कर रहा हैं...”
मैं, “माफ़ करो.. मैं सिर्फ आपको चिढ़ा रही थी.. मुझे कुछ नहीं चाहिए.. i need you.”
वो, "You have me..."
ये हमारे प्यार की नयी नयी शुरुआत थी. ठोस.
हम सब अपना अतीत लेके किसी रिश्ते में जाते हैं. पर प्यार हमारा अतीत, हमारी विचारधाराएं, हमारा स्वरुप, हमारी प्रकृति सब को एकलय कर देता हैं. एक को दुसरे से आप अलग देख भी नहीं सकते..
समर्पण. यही सच्चा प्यार हैं.





