बुधवार, फ़रवरी 06, 2019

बेज़ुबान की जान...!

अभी जब पुणे गई थी तो शिवी ने बताया की वो कभी कभार चिकन खा लेती है। 
वैसे बचपन से उसने कभी नॉनवेज नही खाया था। दसवीं कक्षा मे जब टीबी हुआ तो डॉक्टर ने कहा की मीट, मछली अच्छी रहेगी। मेरा ड्राइवर भी सलाह देता रहा। एक दिन शाम को संजय एक किलो मछली ले आए। मेरे घर में कभी कभार उनके अंडे उबलने के अलावा कुछ नही बनाया गया था। फिर भी मैने इजाज़त दे दी। संजय ने बडे प्यार से बना कर दोनो बच्चो को खिलाया। हम बाहर जाते थे तो संजय ने कबीर को मछली और अंडा भुर्जी ख़ूब खिलाई है। 
संजय के जाने के बाद काफी दिनो तक मेरी सहेलियों से कबीर मैगी अंडा बनवाते थे। पर अब खुद बंद कर दिया है।
मेरे लिए नॉनवेज खाना न खाना हमारी निजी पसंद है। लोगो को जागरुक कर सकती हूँ की नॉनवेज खाना बहुत सारी वजह से सही नही होता पर बहुत बार अगर दवाई की तरह लेना पड़े तो मुझे भी कोई आपत्ति नही होगी।

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