अंग्रेज़ी का एक शब्द है बड्डी(buddy)। बहुत परेशान किया है इस मुए शब्द ने मुझे। हिंदी में सबसे नजदीकी शब्द - यार!
बात ज़्यादा पुरानी नही है पर फ़ेसबुक नया नया था और
उसके ऐप का बडा क्रेज़ होता है। एक ऐप आया अपना बेस्ट बड्डी जानिए। यानि जानिये कि
कौन आप के बड़े फ़ैन है। हमने भी बडी मासूमियत से ऐप चलाया, दो कॉलेज के जूनियर राजीव और आलोक का नंबर
आगे आया। राजीव पास ही रहते थे सो मुलाक़ात भी थी पर आलोक विदेश में कहीं थे सो
सिर्फ़ आभासी जान पहचान थी। ऐप के रिज़ल्ट को शेयर करते हुए हमने दोनो को धन्यवाद दी ख़ासकर राजीव को एक अच्छे
बड्डी होने के लिए फ़ेसबुक के बाहर भी। (Thanks for being my best buddy both on and off fb)
बस पोस्ट होना थी की कही ज़ोरों की आग लग गई। संजय कॉल करते है और पूछते है ये ऑफ़ फ़ेसबुक क्या होता है। हम भी हमेशा से अपनी बागी तरीके से बोल गए,
"जो लिखा है वही मतलब है"
"ज़रूरी था लिखना?"
"कुछ गलत भी नही लिखा"
“सोचो तुम्हे ये क्यों
लिखना पड़ा?”
“भई हम इतना सोच कर नहीं
लिखते!”
फिर शुरू वही बेतुकी बहस.
तुम दुसरो से प्रसंशा चाहती हूँ. तुम्हारे लिए मेरे से ज्यादा सभी अहमियत रखते
हैं. वो बास्टर्ड क्या तुम्हारे लिए मोहन मेकिंस में रुक गया वो ख़ास हो गया..
समझ आता था की ये इर्षा
हैं. खालिश जलन. पर प्यार करती थी सो पूछा क्या करूं. अनफ्रेंड करो उसको, सो कर
दिया. फेसबुक कम करो, सो कर दिया. लगभग दो साल बाहर रही. पर एक बार इर्षा का कीड़ा
काट जाये तो वो जाता नहीं. ताउम्र. एक बार एक दोस्त बनारस जा रहा तो हमने पूछ
लिया, हमें ले चलोगे? जनाब ने चैट देखा और फिर शुरू.. मुझसे कभी क्यों नहीं कहा कि
तुम्हे बनारस जाना हैं. सुनील से कहना जरुरी था... हो गए शुरू और अगले चार महीने
और बर्बाद. वही बहस, वही बे बात की नाराज़गी.
हद तो तब हुयी जब एक बार रंथामबोर
में बहुत पीने के बाद, मुझको धक्का दे कर बोला,
“जाओ राजीव के साथ सो!”
उस रात में नहीं सोयी, मन
किया छोटे से कबीर को ले कर तुरंत होटल छोड़ कर घर वापिस आ जाऊ. नहीं किया, सबसे बड़ी
गलती की. उसकी सजा आज तक मिल रही हैं.
अब पूरे ढाई साल हो गए हैं
छोड़े हुए पर ६ महीने भी शराब पी कर जब कॉल की तो सिर्फ एक ही रट.
“तुम उसके साथ सो रही हो.”
“वो तुम्हारा नया आशिक हैं
तुम्हे बेवकूफ बना रहा हैं.”
“फलाना तुम्हारा यार
तुम्हारे बारे में यह कहता फिर रहा हैं.”
“और हाँ अपने नये यार को
कहना की आज भी मेरे लंड में उसकी दुन्नालियों से ज्यादा ताक़त हैं.”
वाह! ख़ुशी हुयी जानकार की
हम आज भी उनकी प्रॉपर्टी हैं...
कहते हैं औरत में इर्षा
ज्यादा होती हैं. पर मैंने इसका बिलकुल उलट पाया. यह एक इंसानी प्रवृति हैं, जो
इंसानी रिश्तों को खोखला कर देती हैं. प्यार का दूसरा नाम विश्वास हैं, जहां
विश्वास नहीं वहाँ प्यार कभी नहीं जम सकता हैं फिर चाहे आप कितने भी करीबी क्यों
का हो.
हसद ओं जलन में खुद को जला
लिया तुमने
दिल को स्याह कर के क्या
पा लिया तुमने!
