बुधवार, फ़रवरी 06, 2019

मै पागल हूँ...

आज १२ अगस्त है। अंतर्राष्ट्रीय दिन मानसिक रोग जागरूकता का।
"अरे ये तो पगला है।"
"She is a psychopath"
हम मज़ाक़ करते नहीं थकते!! पिछले कुछ दिनों से ख़ुद अपने बारे में वो सब सुनने और पढ़ने को मिला जिससे कोई अच्छा भला भी पागल हो जाए!!
ज़िन्दगी में जो कुछ होता है आपको आगे की सीख या आने वाले ख़तरे की तैयारी के लिए होता है। १० साल पहले की बात है मेरे ज़िन्दगी को एक १२ साल के लड़के ने बिलकुल बदल दिया। वो हमारे साथ एक साल तक था। उसे OCD था। जब उसके पिता छोड़ गए थे तो एक आशा के साथ की वो ठीक हो जाएगा।
बहुत प्यारा बच्चा था। सब कुछ आम बच्चों की तरह बस बाथरूम में ज़्यादा समय लगाता, किसी चीज़ को छूने से पहले दस बार रुकता। पढ़ाई में मन नहीं लगता। मैंने शहर के सबसे अच्छे सायकेटरिसट से अपौयनटमेंट लिया। डा० समीर मल्होत्रा, निज़ामुद्दीन में उनका घर था। पहली बार में उन्होंने बताया कैसे इलाज होगा। हर हफ़्ते १ घंटे का म्यूज़िक थैरेपी का सैशन। कुछ दवाई और घर वालों का व्यवहार कैसा हो। 
एक महिने मे ही बेटा सामान्य हो गया। उसे पेंटिंग और क्राफ़्ट का बहुत शौक़ था। कुछ महिनो में मेरा घर उसकी कला कृतियों से भर गया। उसको ख़ुश देख कर हम सब को बहुत अच्छा लगता था। दिन भर टीवी पर MAD का इंतज़ार करता फिर बाकी समय उसका सीखा हुआ बनाता। एक साल बाद जब वो गया तो बिलकुल ठीक हो कर!
कुछ साल बाद शिवी की बढ़ती उम्र के साथ दिक़्क़तें और पिछले दो साल की मेरी मानसिक स्थिति को समझने में और सही इलाज करने में उसका बहुत बड़ा योगदान है। वो हम सब को थोड़ी इंसानियत सिखा गया। किसी भी मानसिक रोग को मैनेज करना बहुत आसान है। ज़रूरत है तो सिर्फ़ जागरूकता और संवेदनशीलता की।
दोस्तों क्या आज के दिन आप ख़ुद की सोच बदल कर शुरुआत कर सकते है??

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