शुक्रवार, मई 31, 2019

दलित स्त्री लैंगिकता

मेरा टीका ले जा बनिये के

ज़रा सा गुड और दे जा रे बनिये के

तेरा गुड खा कर पछताई

मुझे तो जाने क्या हो गया रे बनिये के 

मुझे दिन में भूख नही लगती बनिये के

मुझे रात भर  नींद आवें बनिये के  

मेरा हंसला ले जा गुजर्र के

ज़रा सा गुड और दे जा रे गुजर्र के

तेरा गुड खा कर पछताई

मुझे तो जाने क्या हो गया रे गुजर्र के 

मुझे दिन में भूख नही लगती गुजर्र के

मुझे रात भर  नींद आवें गुजर्र के

मेरा पैंडल ले जा जाटे के

ज़रा सा गुड और दे जा रे जाटे के

तेरा गुड खा कर पछताई

मुझे तो जाने क्या हो गया रे जाटे के 

मुझे दिन में भूख नही लगती जाटे के

मुझे रात भर  नींद आवें जाटे के

मेरा झूमर ले जा राजे के

ज़रा सा गुड और दे जा रे राजे के

तेरा गुड खा कर पछताई

मुझे तो जाने क्या हो गया रे राजे के 

मुझे दिन में भूख नही लगती राजे के

मुझे रात भर  नींद आवें राजे के



गोरखपान


बनिये तैने ऐसों गुड खिलाया 

मैं मिठ्ठी हो गई

गुजर्र  


राजा के लड़का कहा - सवा महिना रह चली माथा बिंदी ला चली सिर की चुन्नी हटा चली अपना भेद दे चली; सारा भेद ले चली!

बोब्बो क्या हुआ शादी के कुछ दिन रह गए

एक थाली का खाना है

जो तू मेरे सर हो गई 

जो बिना शादी के बिना सगाई 

भेस मर्दाना 

मैदे की औरत बना दी और अंदर सीरा भर दिया

अपना जेवर ओढ़नी उढा दी

राजा की लड़की तीन तुकडे किए 

ख़ून मीठा तो वो क्यों मीठी होगी

सीरा भरा पड़ा वो डंगरो को दे दिया।

उसके पास रहे मौज से 


किसी भी पुरुष की सही पहचान उसके इंटिमेट रिश्तों में व्यवहार से होती है। जो अपनी पब्लिक लाइफ़ चमका कर रखते है  वो ऐसे रिश्तों में ज़बरदस्त मैन्यूपुलेशन करते है!


चल ले चल रे बंगाली 

मेरा ससुरा बोल बोले 

तैने मेरा हाल ख़राब किया के

डंडा उठा कर ले चल रे बंगाली 

मेरा देवर बोल बोले 

तैने मेरा हाल ख़राब किया के

सरसी उठा कर ले चल रे बंगाली 

मेरा लोग बोल बोले 

तैने मेरा हाल ख़राब किया के


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