शनिवार, मई 25, 2019

माफ़ीनामा

प्रिय विक्रम

तुमने शायद ग़लत समय पर कॉल कर दिया था। मैं बहुत ही टूटी हुई हालात मे थी। उसके बाद जो हुआ वो नही होना चाहिए था।

मैंने बिना सोचे समझे तुमसे शादी की। मेरा शादी करना बस एक मजबूरी जैसा था। जिससे मम्मा पापा का मुँह बंद हो जाए। मेरा बस चलता तो शायद आत्महत्या करती। इतनी हिम्मत नही थी। मेरी कमज़ोरी के तुम शिकार हुए। 

शादी जब आँख मूँद कर के की थी तो कोई उम्मीद नही रखनी थी। पर दक़ियानूसी परिवार, गाँव मे शादी ने मुझे और तोड़ दिया। 

दिल्ली आने के बाद सूट वाले के ५००० माँगने ने भी मेरी आँखें नही खोली।

मैं तुम्हें प्यार करने के लिए किसी भी तरह तैयार नही थी।

हम शायद साथ सोने लगे पर मेरे लिए वो सिर्फ़ ख़ुद को सज़ा देने जैसा था। तुम्हारा मुझे बिलकुल भी ख़्याल नही था!

तुम्हारी हर बात मुझे कचोटती थी, तुम्हारा -१० रोटी खाना, रात मे बहुत ज्यादा सोना, घंटों पूजापाठ वही सब मेरे खीज का कारण बनते। 

कुछ बातें जैसे शादी के तुरंत बाद जबलपुर मे तुम्हारे सोने की जगह देखना, ट्रेन मे मेरे ब्रेस्ट पर हाथ पर तुम्हारा चुप रहना, बेबी के भाई के लिए बकरे की बली, अंकल के लिए झूठे बिल बनवाना ये सब जान कर मैं तुमसे और कटती गई

आगे भी जो हुआ सब मेरी कमज़ोरियों की वजह से हुआ। मैंने कभी सच्चाई से तुम्हें प्यार करने की नही सोची। ही उन बातों पर आराम से बात करने की जो मुझे अखरती रही। मैं रिश्ता ढो रही थी जैसे कोई मजबूरी थी। शुरु में तो निकलने की हिम्मत नही थी। पर जब निकलना चाहा तो तुम तैयार नही थे।

शिवी के बीमारी मे मैंने उसकी वजह से तुम्हें आने दिया पर मेरे लिए तुम्हें देखना भी मुश्किल होता था। मेरा संजय से रिश्ता टूटा उसकी भी सज़ा मैंने अंजाने मे तुमको दी।

उस वक़्त जब तुमने डायवोर्स की बात शुरु कि तो मैं सीवियर डिप्रेशन मे थी। शायद उस वक़्त में किसी भी तरह की सुलह की बात करने के हालात मे नही थी। इसलिए वो भी टल गया और हमारा डायवोर्स हो गया। परेशानी में मैंने तुम्हें बहुत दिल दुखाने वाली बातें कहीं उसके लिए मै बेहद शर्मिंदा हूँ।

मै इस रिश्ते की असफलता की पूरी ज़िम्मेदारी लेती हूँ। अगर चाहती तो शायद में इसे बेहतर बना सकती थी।

तुम्हें प्यार जताना नही आता था पर जो भी मेरी मदद की वो हमेशा याद रहेगी। जैसे आर्यन की बीवी को समझाना या जॉनडिस मे मेरा ख़्याल रखना। हमारे ख़्याल बहुत से मामलों मे मेल नही खाते थे पर तुम बस मुँह बना कर अपनी बात कह देते है। उस लिहाज़ा मैं ज़िंदगी पूरी आज़ादी से जी रही थी। संजय के बारे मे भी मैने जब बताया तो तुम कुछ नही बोले। मेरा दिल चाह रहा था की तुम कुछ कहो पर तुमने कभी मुझे टोका नही।

तुम मेरे प्रति हमेशा सच्चे रहे पर मैं रिश्ते के बाहर इमोशनल स्पोर्ट ढूँढने लगी, जिस वजह से संजय को मेरी ज़िंदगी मे जगह मिली।

शिवी मेरे लिए बहुत बड़ा गिफ़्ट थी। उसके होने से मुझे मेरी ज़िंदगी पूर्ण लगने लगी। हाँ बड़ी होने लगी तब ही मुझे दोबारा कमी लगी। शिवी के लिए, बाई, दाई, दादा, सभी दीदी के प्यार के लिए तुम्हें ही शुक्रिया कहूँगी! शिवी के बारहवीं मे  महीने साथ रहना तुम दोनों के लिए बहुत अच्छा रहा। तुमने अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाई!

मेरी तरफ से तुम्हें, तारा को और पूरे परिवार को शुभकामनाएँ। तुम और तारा हमेशा स्वस्थ और ख़ुश रहो

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