शुक्रवार, मई 24, 2019

यारी

ज़िंदगी में बहुत से लोगो से मिली। बहुतों से फ़ेसबुक ने मिलाया। बहुतों से मतभेद हुए। पर मनभेद कभी नही हुए। कल ४०-५० अच्छे दोस्तों को लिस्ट से बाहर किया। ज़रूरी था! कुछ नए को जगह देने के लिए जिसकी अवधि समाप्त हो गई हो उसकी तिलाजंलि देनी पड़ती है। लोग कहते है दोस्ती ताउम्र चलती है। हाँ वही जहा एक दूसरे पे भरोसा हो। विश्वास हो। प्यार हो। एक समय था की बड़ा इनसेक्योर फ़ील करती थी जब कोई रिश्ता टूटता था। समय के साथ जान गई हूँ क्या बचाना है और क्या जाने देना है।

आज बिना नाम लिए ऐसे ही ख़ूबसूरत रिश्ते का वृतांत करती हूँ। हम एक साल पहले फ़ेसबुक पर मिले थे। अभी प्रोफ़ाइल चेक की तो पता चला। ऐसे तो लगता है जैसे सालों से जानते है। बहुतों के अच्छे कमेंट देख मै खुद रिकवेस्ट भेज देती हूँ या जिनका आता है तो म्यूचुअल दोस्त देख कर तय कर लेती हूँ। इनका याद नही। 

खैर मुझे इनसे बेइंतहा प्यार है। ये प्यार जिसे नाम दे नही सकती। लोग कहते है प्यार बाँधता है पर इस प्यार ने मुझे आज़ाद किया है। यहा शब्दों के परे एक भाषा है जिसमें हम बतियाते है। वो प्यार जिसे कभी खोने का डर नही हुआ। जो खुद को खुद से मिलाए ऐसे बेमोल प्यार है ये। किसी कठोर तप का फल!

ज़िंदगी में बहुत अहम निर्णय लेने में मैने इन्हे साथ खड़ा पाया। मेरे हर भाव को समझ कर उसके हिसाब से मुझे छोड़ देना। भटक जाऊँ तो उँगली पकड़ कर चलाना, डरी हूँ तो हग करना, ग़ुस्से में हूँ तो मुस्कुरा कर उसपे पानी फेर देना, कही झगड़ रही हूँ तो दूर से देखना बस, जब तक कहूँ तब तक मदद भी नही करना, डिसप्लीन के नाम पर पूरे हिटलर बन कर पुश करना।

ऑल इन वन है मेरा यार। प्यार में माँ, डिसप्लीन में पापा, खुद की खोज में गुरु, हँसी मज़ाक़ में दोस्त, डाँट में खूसट पुलिसवाला, करुणा में बुद्ध... और एक बहुत ही सादाहरण इंसान।

और मैं क्या हूँ, एक भक्त जिसे आँखें बंद करने की भी बिलकुल इजाज़त नही है!

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