प्रकृति प्रेमी हो तो हर तरह के बर्बादी से बचोगे। ज़रूरत का रखोगे, जितना होगा उसमें चार R का इस्तेमाल करोगे - पहला R है reuse - किसी पुराने का दोबारा इस्तेमाल, कपड़ो की देखभाल करे ताकि वो ज्यादा चले, जो पहनने लायक है उन्हें किसी और को दो और बोर हो जाए तो अगली बदली करो। ये स्टेशनरी बर्तन फ़र्नीचर सबके लिए किया जा सकता है। दूसरा R है repair - छोटी मोटी ख़राबी आए तो उसे सही करवाये - कपड़े आल्टर करवाए साइज़ चेंज होने पर, कोई घरेलू आईटम ख़राब हो उसे मेकेनिक/ सर्विस सेंटर से सही करवाए फेंकने के बजाय। तीसरी R है reduce - यानि सिर्फ ज़रूरत का रखो और उसे इस्तेमाल पर कम से कम वेस्ट का इस्तेमाल करे - प्लास्टिक कम करे। सभी नैच्यूरल रिसोर्सेज़ (डीज़ल, गैस, मेटल) कम इस्तेमाल करे! छिलके कम निकाले। पेपर का इस्तेमाल न करे। घर में वेस्ट को रोज़ मोनिटर करे फिर क्या कम करना है समझ आ जाएगा। चौथा R है recycle ♻️- किचन वेस्ट का कॉम्पोस्ट बनाना। पॉलीथीन / मेटल/ पेपर/ इलैक्ट्रिक आईटम सब रिसाइक्लिंग हो जाती है।
इन चारों R से आप प्रकृति को अपनी कतृज्ञता दिखा सकते है। ये सब एक बिहेवियर है जो संस्कृति का हिस्सा है जो हमें परिवार/ समाज से मिलता है। हम तो हल्दी टेबल पर गिर जाए तो उबटन में यूज कर लेते है। आज सालों बाद सिलाई मशीन दिखी तो सभी कपड़े ख़ुद ठीक कर डाले! आप अपना योगदान साझा करे!
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