मंगलवार, नवंबर 18, 2025

तस्वीर

तब बेटा छोटा था. हम घंटों कैनन के दूकान पे बिताते.
लाखों के कैमरा लेंस. शायद उनको सीखने का बहुत शौक़ था, और मुझे उनका साथ देने का...
जितने समय उनके साथ मिलता हमेशा कम ही लगता था.
कुमारजी के पास जा कर दो चीज़ ले आना... हाँ पहुँचो तो कॉल करना..
घंटो इंतज़ार कर के उनको फ़ोन पे....
हांगकांग गयी तो, निकोन का लेंस..
अपने लिए कैमरा लेना हैं, कौनसा लें? कैनन खराब हो गया हैं! नया लो.

तस्वीर वो जो लखनऊ के होटल में खिची थी...
परसों जब मैंने तस्वीर मांगी तो बोले, सारा आर्काइव डिस्ट्रॉय कर दिया हैं.. कुछ नहीं बचा!
कुछ दिन पहले रानीखेत की कुछ तस्वीर देखीं तो अजीब लगा. वो सच था, या ये...
तस्वीर मिटा दी होगी, पर जो दिल-दिमाग पे उतारी थी उसे कैसे उतारोगे...

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