अजीब दुनिया हैं, कभी अपने विश्वास करना छोड़ देते हैं तो कभी राह पर चलने वाला अकथ विश्वास कर लेता हैं...
आज कुछ ऐसा ही हुआ, सचिन दा के गाने सुनते सुनते पता ही नहीं चला की कब ९:३० बज गए. Epicenter से बाहर निकली तो गार्ड बोला, अब ऑटो मिलना मुश्किल हैं, गोल्ड सूक जा कर कोशिश करूँ. चल दी, मन में अजीब ख़याल, यह वही गुडगाँव हैं जहां कुछ दिन पहले किसी महिला का सड़क से उठा कर बलात्कार हुआ था; फिर मन को समझाया तो मन में कुछ सकारात्मक विचार भी आने लगे. कोई भला इंसान तो होगा जो गाडी रोक कर पूछेगा...
दो फल वाले, और उनके पास रुकी गाडिया पार की, कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की, इन्तेज़ार था कोई कुछ पूछेगा. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ!
कुछ १०० मीटर आगे आई, तो अचानक एक प्यारी सी लड़की ने गाडी रोकी.
बोली, "do you need a drop somewhere?".
कुछ हिचकिचाहट हुई. पर जब उसने दरवाज़ा खोला तो मैं बैठ गयी.
मैंने बड़ी हिम्मत से बोला "can you leave me at the crossing? i will get an auto".
मुझे पता था शायद ऑटो वहाँ भी न मिले. हम क्रोस्सिंग पर पहुंचे, तो मेरे बोलने से पहले बोली, "कोई बात नहीं, आपको आगे छोड़ देती हूँ." अपना नाम प्रज्ञा बताया. हमने कुछ दिल की बातें की! मुझे छोड़ कर काफी देर तक हम एक-दूसरे को देख कर हाथ हिलाते रहे...
जब आपका अच्छाई से विश्वास उठा रहा हो, तो भगवान् इंसान रूप में आ कर आपको विश्वास दिला देता हैं की "हर इंसान में अच्छाई हैं"... उसे देखो, समझो और जानो तो जीवन कितना खुबसूरत हो जाता हैं...
आज कुछ ऐसा ही हुआ, सचिन दा के गाने सुनते सुनते पता ही नहीं चला की कब ९:३० बज गए. Epicenter से बाहर निकली तो गार्ड बोला, अब ऑटो मिलना मुश्किल हैं, गोल्ड सूक जा कर कोशिश करूँ. चल दी, मन में अजीब ख़याल, यह वही गुडगाँव हैं जहां कुछ दिन पहले किसी महिला का सड़क से उठा कर बलात्कार हुआ था; फिर मन को समझाया तो मन में कुछ सकारात्मक विचार भी आने लगे. कोई भला इंसान तो होगा जो गाडी रोक कर पूछेगा...
दो फल वाले, और उनके पास रुकी गाडिया पार की, कुछ लोगों से बात करने की कोशिश की, इन्तेज़ार था कोई कुछ पूछेगा. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ!
कुछ १०० मीटर आगे आई, तो अचानक एक प्यारी सी लड़की ने गाडी रोकी.
बोली, "do you need a drop somewhere?".
कुछ हिचकिचाहट हुई. पर जब उसने दरवाज़ा खोला तो मैं बैठ गयी.
मैंने बड़ी हिम्मत से बोला "can you leave me at the crossing? i will get an auto".
मुझे पता था शायद ऑटो वहाँ भी न मिले. हम क्रोस्सिंग पर पहुंचे, तो मेरे बोलने से पहले बोली, "कोई बात नहीं, आपको आगे छोड़ देती हूँ." अपना नाम प्रज्ञा बताया. हमने कुछ दिल की बातें की! मुझे छोड़ कर काफी देर तक हम एक-दूसरे को देख कर हाथ हिलाते रहे...
जब आपका अच्छाई से विश्वास उठा रहा हो, तो भगवान् इंसान रूप में आ कर आपको विश्वास दिला देता हैं की "हर इंसान में अच्छाई हैं"... उसे देखो, समझो और जानो तो जीवन कितना खुबसूरत हो जाता हैं...

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