रविवार, जनवरी 22, 2017

चुनी कोटल - भूली बिसरी कहानियां


आज रोहित वेमुला को शायद पूरा देश जान गया है। उसके मरने के तुरंत बाद के प्रोटेस्ट का मै भी हिस्सा थी। पर रोहित की आत्महत्या पहली संस्थागत हत्या नही थी! 
आपमें से कितनों ने चुन्नी कोटल का नाम सुना है? सुना भी क्यों होना चाहिए! वो एक असभ्य और अशिष्ट आदिवासी लोधा समाज की पहली कॉलेज जाने वाली लडकी थी। 
उसके साथ क्या हुआ था? बंगाली भद्रलोक को उसका आगे बढ़ना पसंद नही आ रहा था। एक जंगली और आपराधिक जनजाति की लडकी कैसे पढ़ सकती है! उसे प्रताड़ित किया गया और आत्महत्या करने पर मजबूर किया गया। शायद रोहित वैमुला से ज्यादा विभत्स केस था पर पिछड़े और अधिकारहीन की अपनी आवाज़ कहा सुनी जाती है। होती भी है तो उसे चुप करा दिया जाता है। पर उन्हीं भद्रलोक में से कुछ लोगों ने उसकी आवाज़ बनने की कोशिश की। ढे़रों पेपर और किताबें लिख डाले। नही तो शायद मै ये लिख नही पा रही होती! (वैसे रोहित वैमुला के माँ की जाति 'माला' भी मुलनिवासी जनजाति ही है जिसने हिंदू अधिपत्य को बहुत पहले मान लिया था!)


महाश्वेता देवी की किताब "ब्यधखंड" का रिव्यू न पढ़ा होता तो शायद उसे ख़रीदने का सोचती भी नही। वो जिस लोधा गाँव की काल्पनिक कहानी कह रही है उसका नाम भी अरिहारा है जो मेरे ननिहाल का नाम भी है! अरिहारा यानि दुश्मनों को हराने वाला गाँव! बचपन से लोधी समाज की वीर गाथाओं (oral histories) में सुना है की लोधों ने अंग्रेज़ों को बंगाल में सबसे पहले ललकारा था, जिस वजह से उन्हें बहुत प्रताड़ित किया गया, जंगलों में डकेल दिया गया, उनकी ज़मीन छीन ली गई और उन्हें आपराधिक जनजाति घोषित कर दिया गया। लोधों ने शायद सबसे लम्बे समय तक न सिर्फ ब्राह्मणवाद से लड़ा है पर अंग्रेज़ों को भी दाँतो तले उँगली दबानी पड़ी। यही कारण है आज भी ढेरों लोधी गाँव के अपनी ज़मीन और गाँव में ब्राह्मण और बनिए नही मिलेंगे! हाँ शहरीकरण और ब्राह्मणीकरण से वो उत्तर भारत में अनछुए नही रह पाए और १९३२ की लोधी महासभा में खुद को राजपूत और क्षत्रिय घोषित कर दिया! कल का मेरा शेयर किया फोर्वडप्रेस का आर्टिकल "क्या लोधा को हिंदू धर्म अपना लेना चाहिए" जो बंगाल, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के लोधा पर है, लगा की मेनस्ट्रीम इंडिया उन्हें सच में जीने नही दे रहा है! अजीब है, बचने के लिए आपको खुद के दुश्मन को साथ सोना पड़ता है! (Sleeping with the enemy)



वैसे किताब का नाम मुझे ज्यादा intriguing लगा। "The book of the hunter"! सोचिए कौन असल शिकारी है? वो जो पेट भरने के लिए और अपनी जल ज़मीन जंगल बचाने के लिए शिकार करता है या वो जो उनसे छल कपट से उनकी ज़मीन जंगल छीनते ही नही बल्कि जंगलों पर क़ब्ज़ा कर लेते है, उनके गाँव के गाँव जला देते है, उनके पढ़ने और आगे बढ़ने से रोकते है, वो जो उन्हें अपने शातिर तरीक़ों से रोज़ शिकार करते है!








History will be rewritten when the hunted will write about the hunter!

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