सोमवार, सितंबर 02, 2013

पहचान..



अभी कुछ दिन पहले सुनने को मिला, "मैं उसके पास वापिस नहीं जाऊंगा. पर उसके बेटे को अपना नाम जरुर दूंगा."
क्या अजब हैं दुनिया की रीत. पहचान बनाने के लिए न कोई मेहनत की जरुरत हैं और न अन्दर टटोलने की. बस जन्म ले लो किसी मर्द(?) के शुक्राणु से. मिल गयी पहचान! एक नाम का बाप और न जाने उसके कितने बेनामी बाप! इतने पीछे चले जाते हैं और इतने अहम् से जैसे डीएनए टेस्टिंग करवा रखी हो हर बच्चे की.
“कुछ बताना हैं, सुनोगी?”
“बताओ”
“पुरु मेरे पूर्वज थे, इसलिए वो सिकंदर से हार गए”
“आपके पूर्वज होने और हारने में क्या लेना देना? कोई भी हार सकता हैं, कोई भी जीत सकता हैं”
“हम सब परास्त होने वाले हैं! कृष्ण, लालू, मुलायम”
“कृष्ण लूज़र(loser)?”
“पहले कृष्ण ने अपनों को खो दिया. फिर एक धनुषधारी के तीर ने उन्हें भी एडी में मार दिया!”
“पर हम सब तो उनकी पूजा करते हैं न!”
“कृष्णा राधा के थे इसलिए उनकी पूजा की जाती हैं. महाभारत में तो वो परास्त हुए थे!”
“तो वो प्यार के लिए पूजे जाते हैं”
“हाँ, वो प्यार में भी राधा से हार गए!”
“कैसे?”
“अगर राधा और मीरा नहीं, तो क्या कृष्ण होते?”
“वो एक चालाक तिकड़मबाज़ थे जिन्होंने युद्ध में हर दुष्ट योजना और छल कपट का इस्तेमाल किया. में भी गोपी हूँ. गोपी सारे धूर्त होते हैं."
“पर पुरु हारा क्यों?”
पुरु के पास हाथी थे जबकि सिकंदर के पास धनुषधारी थे. बहुत तेज बारिश हो रही थी. हाथी तेज नहीं चल पा रहे थे. धनुषधारी दूर से ही तीर चलाये जा रहे थे..”
“पर इसका पुरु के हारने से क्या लेना देना. जो पुरु ने जाना उसने वो किया, जो सिकंदर ने जाना उसने वो किया...”
"सुनो, हमारे बेटे के कान जरुर छेदना. बिलकुल एक पक्के यादव की तरह इसे बड़ा करना.."
कितने बंधे हुए थे वो इस पहचान से. जैसे पहचान न हुयी तो हमसे इस ज़मीन पर खड़े होने का हक ही छीन लिया जायेगा. शायद इसलिए कभी हमारे बेटे को नहीं स्वीकार पाए.
उस बाप की पहचान ही क्या जिसने उसे न कभी देखने की चाह हुयी, न जोर के हग्गी देने की, न धीरे से हग्गी देने की. न जोर से किस्सी देने की और न धीरे से किस्सी देने की... बाप जो साल पहले खो गया हैं. रह गयी हैं हैं तो एक खीज, “कब आयेंगे वो?”. शायद इस खीज के आगे ही उसकी पहचान हैं.
पहचान बच्चे को अपने वजूद से मिलती हैं, न की सड़े-गले जातिवादी अतीत से, वो अतीत जो उसे अकेला छोड़ गया. वो माँ जो आगे बढ़ गयी सच के लिए. वो बाप जो आगे बढ़ गया झूठी इज्ज़त के लिए... हरामी वो नहीं, हरामी उसके माँ-बाप हैं जिन्होंने उससे उसका बचपन छीन लिया. वो माँ हैं जो बच्चे को ज़माने के लिए छोड़ देती हैं या वो बाप हैं जो उसको माँ के गर्भ में सिर्फ इस लिए मारना चाहता था क्योंकि उसका उसकी माँ से परदे में जो रिश्ता हैं जो नाजायज नहीं साबित हो सकता पर बच्चा हो गया तो सब स्वाहा. हरामी वो समाज हैं जो बाप-बेटे को इस लिए अलग रखता हैं क्योंकि वो सार्वजनिक शादी से नहीं हुआ हैं. मन से अगर कोई पति-पत्नी हैं, तो वो पापी हैं और बच्चा पाप!

अगर हमारे बेटे को पहचान चाहिए तो उसकी जिसने उसे भूल-भुलैया में अँधेरे से लड़ना सिखाया, या जिसने उसे जंगलो को अपना साथी बनाना सिखाना, या जिसने पंगोत की नयी-नयी बर्फ के अनजाने डर के आगे देखना सिखाया. वही उसकी सही पहचान हैं.

पहचान कोई भीख नहीं हैं जो मेरे बेटे को उसका लूज़र(loser) बाप देगा. वो बाप जिसने उससे उसका बचपन छीना. अपने स्वार्थ के लिए. समाज में सफ़ेद पोश बने रहने के लिए.
 
न ही पुरु की हिम्मत और न ही कृष्णा की रास-लीला! उसकी पहचान ये नहीं हैं.. वो अपनी पहचान खुद बनाएगा...

4 टिप्‍पणियां:

Nachiketa Desai ने कहा…

"पहचान बच्चे को अपने वजूद से मिलती हैं, न की सड़े-गले जातिवादी अतीत से, वो अतीत जो उसे अकेला छोड़ गया. वो माँ जो आगे बढ़ गयी सच के लिए. वो बाप जो आगे बढ़ गया झूठी इज्ज़त के लिए... हरामी वो नहीं, हरामी उसके माँ-बाप हैं जिन्होंने उससे उसका बचपन छीन लिया."

Pyarelal Bhamboo ने कहा…

नारी के सहज स्वाभाविक सृजक व्यक्तित्व को किसी प्रदत पहचान की आवश्यकता नहीँ।

Sanjeev Bansal ने कहा…

राधा ने कृष्ण को छोड़ा समाज के दायरे में बंधकर उसके बाद ही प्रेम ने कृष्ण को कृष्ण बना दिया इसी कारण जब जब कृष्ण की कही पूजा हुई इसका श्रेय उन्होंने राधा को दिया
राधा के जाने के बाद कृष्ण तत्कालीन बुराइयों से उलझ गए अधर्म को समाप्त करने के लिये उन्होंने अधर्म का सहारा लिया क्योकि अधर्म को सत्य से पराजित नही किया जा सकता अधर्मी के सामने सत्य का व्यवहार अधर्मी को और मजबूत करता है

Sanjeev Bansal ने कहा…

स्त्री हो या पुरुष वर्तमान में अधिकांश समाज से बंधे है अपने व्यक्तित्व को स्वीकार करके स्वतन्त्र भाव से जो भी चलता है वही समाज के बाहर जीने की हिम्मत कर सकता है जो जैसा है वैसा ही खुद को प्रस्तुत करने की हिम्मत रखता है वही समाज का अतिक्रमण कर पाता है