अरुंधती सो नहीं पा रही थी. रह रह कर वशिष्ठ की बलिष्ठ बाहें सता रही थी. एक बार उन्हें छू भर ले तो उसे नींद आ जाये. पर यह अब कहाँ मुमकिन था.
उसे पता था की मन की तृष्णा अब शायद ही पूरी हो. वशिष्ठ अब उसके पास नहीं आ पायेगा.
वशिष्ठ भगवान् नहीं था, शायद दुनिया का सबसे ज्यादा अय्याश, धोखेबाज़ और भ्रष्ट मानव था. पर जब दिल गधे पर आ जाये तो किसी और को कहाँ जगह मिलने वाली थी. खुद को पूरी तरह उसका बनाना भी उसके लिए आसन नहीं था, पर जब एक बार ठान लिया तो खुद को जीवन भर के लिए समर्पित कर दिया.
उसको जीना था, वशिष्ठ के लिए, खुद के लिए और उसके आने वाले कल के लिए. अरुंधती जानती थी की उसमें इतनी उर्जा हैं की वो जो चाहे कर सकती हैं. कितने रोते बच्चों को हंसा सकती हैं, बिलखती माँओ को संभाल सकती हैं, लोगों को जोड़ सकती हैं, दुनिया बदल सकती हैं.
पर उसकी खुद की ज़िन्दगी उसके बस में नहीं हैं. वशिष्ठ कहीं गुम हो गया हैं. वो वशिष्ठ जिसके कुछ पल हाथ थामने से उसकी उर्जा सौ गुनी बढ़ जाती थी.
उसे पता हैं ही अगर वो बुत के साथ होगी तो वशिष्ठ के साथ धोखा होगा. पर आज उसको वशिष्ठ का प्यार जिंदा रखना हैं, क्योंकि उसने खुद को ये वचन दिया था. उसका सतीत्व ही उसकी असली उर्जा थी.
और उसे पता हैं, सिर्फ एक बुत ही उसकी मदद कर सकता हैं. रात के अँधेरे में, कुछ पल के लिए आँखें बंद कर के वो बुत में वशिष्ठ की बलिष्ठ बाहें ढूँढ लेती हैं. अगला दिन बेहतर हो जाता हैं, उसके लिए और उन सब के लिए जो वशिष्ठ की अरुंधती पर आश्रित हैं.
हम छूते हैं उसको पत्थर की बुत समझकर.
हमें डर हैं की वो इंसान न बन जाए...
उसे पता था की मन की तृष्णा अब शायद ही पूरी हो. वशिष्ठ अब उसके पास नहीं आ पायेगा.
वशिष्ठ भगवान् नहीं था, शायद दुनिया का सबसे ज्यादा अय्याश, धोखेबाज़ और भ्रष्ट मानव था. पर जब दिल गधे पर आ जाये तो किसी और को कहाँ जगह मिलने वाली थी. खुद को पूरी तरह उसका बनाना भी उसके लिए आसन नहीं था, पर जब एक बार ठान लिया तो खुद को जीवन भर के लिए समर्पित कर दिया.
उसको जीना था, वशिष्ठ के लिए, खुद के लिए और उसके आने वाले कल के लिए. अरुंधती जानती थी की उसमें इतनी उर्जा हैं की वो जो चाहे कर सकती हैं. कितने रोते बच्चों को हंसा सकती हैं, बिलखती माँओ को संभाल सकती हैं, लोगों को जोड़ सकती हैं, दुनिया बदल सकती हैं.
पर उसकी खुद की ज़िन्दगी उसके बस में नहीं हैं. वशिष्ठ कहीं गुम हो गया हैं. वो वशिष्ठ जिसके कुछ पल हाथ थामने से उसकी उर्जा सौ गुनी बढ़ जाती थी.
उसे पता हैं ही अगर वो बुत के साथ होगी तो वशिष्ठ के साथ धोखा होगा. पर आज उसको वशिष्ठ का प्यार जिंदा रखना हैं, क्योंकि उसने खुद को ये वचन दिया था. उसका सतीत्व ही उसकी असली उर्जा थी.
और उसे पता हैं, सिर्फ एक बुत ही उसकी मदद कर सकता हैं. रात के अँधेरे में, कुछ पल के लिए आँखें बंद कर के वो बुत में वशिष्ठ की बलिष्ठ बाहें ढूँढ लेती हैं. अगला दिन बेहतर हो जाता हैं, उसके लिए और उन सब के लिए जो वशिष्ठ की अरुंधती पर आश्रित हैं.
हम छूते हैं उसको पत्थर की बुत समझकर.
हमें डर हैं की वो इंसान न बन जाए...

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