आज
सुबह एक कॉल आया, "जय गुरु देव, आपने जो ७ साल पहले दान दिया था, उस पैसे
से जो मीटिंग हॉल बनना था पीतमपुरा में, वो तैयार हैं. आप इतवार को जरुर
आये!"
मेरा जन्म एक आर्य समाजी परिवार में हुआ. बचपन से हवन और संध्या करती रही हूँ... मिशनरी स्कूल में पढ़ी इसलिए ईसाई धर्म को भी माना. आज भी धन्यवाद में क्रॉस "थैंक गॉड" हो जाता हैं. शादी के बाद हिन्दू देवी-देवताओं को जाना. खूब बेमन से सारे अंधविश्वासों को अपनाया. रिश्ते में परेशानी आई तो आर्ट ऑफ़ लिविंग किया. फिर रेकी. फिर ओशो. फिर इस्लाम. फिर बुद्ध-धर्म. जो किया पूरी तरह से. अच्छी तरह पढ़ कर, समझ कर, पूरी आस्था से, सारे अन्धविश्वासो सहित, बिना तर्क के... किसलिए?
शांति के लिए. ख़ुशी के लिए. मिली? शायद नहीं...
धर्म सहारा नहीं हैं... अगर सहारा हैं तो सिर्फ अपना. फिर क्यों भागी मैं किसी सहारे के लिए?
मेरा जन्म एक आर्य समाजी परिवार में हुआ. बचपन से हवन और संध्या करती रही हूँ... मिशनरी स्कूल में पढ़ी इसलिए ईसाई धर्म को भी माना. आज भी धन्यवाद में क्रॉस "थैंक गॉड" हो जाता हैं. शादी के बाद हिन्दू देवी-देवताओं को जाना. खूब बेमन से सारे अंधविश्वासों को अपनाया. रिश्ते में परेशानी आई तो आर्ट ऑफ़ लिविंग किया. फिर रेकी. फिर ओशो. फिर इस्लाम. फिर बुद्ध-धर्म. जो किया पूरी तरह से. अच्छी तरह पढ़ कर, समझ कर, पूरी आस्था से, सारे अन्धविश्वासो सहित, बिना तर्क के... किसलिए?
शांति के लिए. ख़ुशी के लिए. मिली? शायद नहीं...
धर्म सहारा नहीं हैं... अगर सहारा हैं तो सिर्फ अपना. फिर क्यों भागी मैं किसी सहारे के लिए?
2 टिप्पणियां:
अमिता मै आपनी जिन्दगी मे बहुत से लोगों से मिला हूं उनके विचारों को भी सुना ओर जाना परन्तु आज ही मै फेस बुक पर आपसे जुडा हूं लगभग एक घन्टा बहुत कुछ पढा़ मैंआपके विचारों से आपकी सोंच से बयां करने के अन्दाज से जिन्दगी की इतनी बडी बडी कठिनाइयो सहज भाव स्वीकृति ।मेरै पास शब्द नही हैं अन्त मै यही कहूंगा नतमस्तक हूं आपके विचारों से
शुक्रिया ललित। दिल से लिखती हूँ और सिर्फ खुद के लिए।
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