प्रकृति
की गोद में एक छोटा सा गाँव. बेहद खूबसूरत, हमेशा बादलों और अनेको तरह के
फल-फूल से भरा. अनानास, आम, लीची, अमरुद, कटहल से भरपूर जंगल और बगीचे.
“मेद्ज़िफेमा” नाम था स्थानीय अंगामी भाषा में, यानी "आम का गाँव". पर आम
बोल-चाल में घासपानी.. घास तो बहुत थी, पर दिनों नल में पानी नहीं होता था!
हर घर की टिन की छत ने नीचे आधा बांस बंधा होता था, बारिश के पानी को एक
ड्रम में भरने के लिए. बारिश साल में ९ महीने
होती थी. फिर उसी पानी से सारा घर का सारा काम चलता था. पीने के लिए, ३ कम
दूर एक झरना था, जिसका पानी बहुत मीठा था!. पापा जब पानी नहीं होता तो
सुबह-सुबह वहा नहाने जाते और साथ में २ डब्बों में पीने का
पानी लाते.
मेरी एक सहेली नीनो जिसका मेरा साथ स्कूल की पहली पहाड़ी तक का था, अचानक ही येशु की प्यारी हो गयी. उन्ही दिनों मेरी जूली से दोस्ती हुयी थी. छठी कक्षा में हम घसपानी के एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में साथ-साथ पढ़ते थे. जूली की माँ भी उसी स्कूल के प्राइमरी विंग की प्राचार्य थी. मौहौल ऐसा था की हर बच्चा ५-६ कक्षा में आ कर बड़ा हो जाता था. हमको बचपन ने नहीं छोड़ा था, मैं और जूली छोटी छोटी बातों में खुश हो लेते थे.
जूली का घर स्कूल के पीछे ही था. एक छोटा सा स्वर्ग. अपने में पूर्ण. गाय, मुर्गे, कुत्ते, बिल्ली और ४ भाई-बहन. घर के चारो तरफ जो हरी फेंस थी उसे पार करने के लिए बांस की सीडी. साग सब्जी, फल फूल से भरा बहुत सुन्दर बगीचा. मैं अक्सर जूली से फूलों के नाम और उनके बारे में जानती, वो मुझसे हमारे घर के बारे में जानती. एक दिन उसने बताया की उसके दादा लन्दन में रहते हैं और शाही परिवार को भी जानते हैं. उस वक़्त अच्छी चॉकलेट खाना और सुन्दर फोटो देखना ही लन्दन का अहसास दिलाता था...
आठवी कक्षा में आये तो सरकारी स्कूल जाना पड़ा. अंग्रेजी के राम सर (जो बिहार से थे) और सोशल की सुज्ही मैडम (जो सिविल सर्विसेज जी तयारी कर रही थी) मेरे बहुत प्रिय थे. भाषा से प्यार, विज्ञान को प्रयोगों से जानना, समाज और देश के बारे में जानना, स्थानीय सभ्यता, काष्ठ्कर्म, चर्च सेवा(हम खुद हर हफ्ते चर्च की मिटटी की लिपाई करते थे), बास्केटबॉल; सब इतनी सहजता से साथ सीख रहे थे हम. जूली के साथ अक्सर उसके घर आना-जाना लगा रहता था. अब ये पता चल गया था की मेरी सबसे प्यारी सहेली, भूमिगत नागा लीडर, AZ फिजो की पोती हैं.
कुछ दिन पहले, मेरे एक IAS दोस्त जो नागालैंड में हैं, उनसे मुझे जूली की बहन का मोबाइल मिला. जूली से भी बात हुयी. १० कक्षा में उसने हमारे ही कक्षा के फुटबॉल चेम्प, रोकोंगुले से शादी कर ली. १० साल पहले उसकी मौत हो गयी. ५ बच्चे हैं. बड़ा बेटा २२ का और सबसे छोटी बेटी १४ की. खुद यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन हैं... मैंने पूछा, "कैसी हैं, समय कैसे बितता हैं.?" बोली, “खुश हूँ. काम, घर और बच्चों से फुरसत नहीं मिलती, जो मिलती हैं तो चर्च की सेवा करती हूँ.”!
आज भी जूली उन छोटी-छोटी बातों से खुश हो लेती हैं, और मैं?
मेरी एक सहेली नीनो जिसका मेरा साथ स्कूल की पहली पहाड़ी तक का था, अचानक ही येशु की प्यारी हो गयी. उन्ही दिनों मेरी जूली से दोस्ती हुयी थी. छठी कक्षा में हम घसपानी के एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में साथ-साथ पढ़ते थे. जूली की माँ भी उसी स्कूल के प्राइमरी विंग की प्राचार्य थी. मौहौल ऐसा था की हर बच्चा ५-६ कक्षा में आ कर बड़ा हो जाता था. हमको बचपन ने नहीं छोड़ा था, मैं और जूली छोटी छोटी बातों में खुश हो लेते थे.
जूली का घर स्कूल के पीछे ही था. एक छोटा सा स्वर्ग. अपने में पूर्ण. गाय, मुर्गे, कुत्ते, बिल्ली और ४ भाई-बहन. घर के चारो तरफ जो हरी फेंस थी उसे पार करने के लिए बांस की सीडी. साग सब्जी, फल फूल से भरा बहुत सुन्दर बगीचा. मैं अक्सर जूली से फूलों के नाम और उनके बारे में जानती, वो मुझसे हमारे घर के बारे में जानती. एक दिन उसने बताया की उसके दादा लन्दन में रहते हैं और शाही परिवार को भी जानते हैं. उस वक़्त अच्छी चॉकलेट खाना और सुन्दर फोटो देखना ही लन्दन का अहसास दिलाता था...
आठवी कक्षा में आये तो सरकारी स्कूल जाना पड़ा. अंग्रेजी के राम सर (जो बिहार से थे) और सोशल की सुज्ही मैडम (जो सिविल सर्विसेज जी तयारी कर रही थी) मेरे बहुत प्रिय थे. भाषा से प्यार, विज्ञान को प्रयोगों से जानना, समाज और देश के बारे में जानना, स्थानीय सभ्यता, काष्ठ्कर्म, चर्च सेवा(हम खुद हर हफ्ते चर्च की मिटटी की लिपाई करते थे), बास्केटबॉल; सब इतनी सहजता से साथ सीख रहे थे हम. जूली के साथ अक्सर उसके घर आना-जाना लगा रहता था. अब ये पता चल गया था की मेरी सबसे प्यारी सहेली, भूमिगत नागा लीडर, AZ फिजो की पोती हैं.
कुछ दिन पहले, मेरे एक IAS दोस्त जो नागालैंड में हैं, उनसे मुझे जूली की बहन का मोबाइल मिला. जूली से भी बात हुयी. १० कक्षा में उसने हमारे ही कक्षा के फुटबॉल चेम्प, रोकोंगुले से शादी कर ली. १० साल पहले उसकी मौत हो गयी. ५ बच्चे हैं. बड़ा बेटा २२ का और सबसे छोटी बेटी १४ की. खुद यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन हैं... मैंने पूछा, "कैसी हैं, समय कैसे बितता हैं.?" बोली, “खुश हूँ. काम, घर और बच्चों से फुरसत नहीं मिलती, जो मिलती हैं तो चर्च की सेवा करती हूँ.”!
आज भी जूली उन छोटी-छोटी बातों से खुश हो लेती हैं, और मैं?

2 टिप्पणियां:
Medziphema is also known for its pineapples. There are several villages around this town that cultivate pineapples at a large scale; some are even called as pineapple villages for their mass cultivation. Though not confirmed it is said that pineapples of Medziphema are the sweetest in the world. (source wiki http://en.wikipedia.org/wiki/Medziphema)
सुन्दर रेखाचित्र खींचा है अमिता जी । साकार हो उठा सब। उत्तर पूर्व की बात ही निराली है।
कंडवाल मोहन मदन
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